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इतिहास आधुनिक भारत का | Rajasthan GK

इतिहास आधुनिक भारत का by Innoza IT Center, Udaipur

आधुनिक भारत में बहुत से युद्ध व अंग्रेजी शासनकाल का इतिहास है। भारत के अलग-अलग जगहों की आर्थिक व  सामाजिक स्थितियों के आधार पर आधुनिक भारत का इतिहास जानने को मिलता है जिसमें प्रमुख है।

अंग्रेजो ने भारत में सबसे पहले राजा-महाराजो को सैन्य सुरक्षा दिलाने के झांसे  में फंसाकर उन्हें आपस में लडवाया।  और यहाँ व्यापार करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी की शुरुआत की इस तरह यहाँ के राजाओ को साथ में मिलाकर भोली-भाली जनता पर अत्याचार कर शोषण किया गया, बाद में असहनीय जनता ने इसका विरोध शुरूकर दिए और अलग-अलग जगह आन्दोलन विद्रोह शुरू कर दिए, जिसमे जन-हानी हुयी कई लोगो ने अपनी बलिदानी भी दी अंत में अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया था।  इस तरह आधुनिक भारत का निर्माण लम्बे समय के संघर्ष के बाद हुआ।

 कुछ प्रमुख घटना व युद्ध और विद्रोह : 

 

प्लासी का युद्ध – यह 23जून 1757ई. बंगाल के नवाब  सिराजुद्धोला और अंग्रेजो के बिच हुआ जिसमे उसे सिराजुद्धोला को हार सामना करना पडा था।

बक्सर का युद्ध – 23 अक्टूम्बर 1764 ई. को यह बंगाल के नवाब मीरकासिम, अवध नवाब,  मुग़ल सम्राट शाहआलम तीनो की सेना ने एक साथ अंग्रेजी सेना व मुनरो के नेतृत्व में हुआ जिसमे अंग्रेजो की जीत हुयी तीनो की सेना को हार का सामना करना पडा था।

अंग्रेजी सेना के प्रमुख अधिकारी गवर्नर व जनरल गवर्नर होते थे ।

गवर्नर – यह अंगरेजी सेना कंपनी का सबसे सर्वोच्च अधिकारी होता था।

जनरल गवर्नर –  यह भारत में ब्रिटीश सेना का सर्वोच्च अधिकारी होता था।

 

 भारत का सर्व प्रथम स्वतंत्रता संग्राम : 

 

बैरकपुर छावनी से मंगल पांडे ने नेशनल कमान रेजीडेंट के सैनिक को मौत के घाट उतार दिया था, बाद में मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को अंग्रेजो ने फासी दे दी गयी जिससे क्रांती नी और बड़ा रूप ले लिया और एक के बाद एक करके क्रांती होती गयी।

1857 की क्रांती – यह क्रांती मेरठ छावनी से 10 मई 1857 से शुरू हुई थी।

जिसका प्रतिक व कमल रोटी था, ईस क्रांती  में अलग-अलग जगहों से अलग-अलग क्रांतीकारीयों ने नेतृत्व किया था जिसमे कुछ प्रमुख है।

वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट – यह भारत के समाचार पत्रों में रजद्रोही लेखो के प्रकाशन पर समाचार पत्र की जमानत व छापेखानो को बंद करने का नियम बनाया गया ताकी इस तरह के लेख  जनता तक नहीं पहुच सके।

इल्बर्ट बिल विवाद – इस बिल का उधेश्य जाती भेद पर आधारीत सभी न्यायिक योग्यताओ को ख़त्म करके यूरोपीय शक्तियों के समान करना था।

भारत का राष्ट्रीय आन्दोलन – भारत का यह आंदोलन सबसे अधिक लम्बे समय तक चला व आजादी मिलाने तक जारी रहा इसका नेतृत्व अलग-अलग क्रान्तिकारियो ने किया जिसकी शुरुआत कांग्रेस की स्थापना के साथ मानी जाती है।

भारतीय कांग्रेस की स्थापना – प्रथम राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन 28 दिसम्बर 1885 ई. मुम्बई में हुया जिसमे 72 सदस्यों ने भाग लिया था।

बंगाल का विभाजन – देश भक्ति की भावना तोड़ते हुये 1905 ई.  में बंगाल  का विभाजन कर दिया गया, जिससे देश के दो भाग हो गए और बंगाल को अलग प्रांत घोषित कर दिया गया इससे कान्तिकारी आन्दोलन ने अलग रूप ले लिया।

मुस्लिम लीग की स्थापना – 30 दिसंबर 1906 ई. को  आगा खां ढाका के नवाब सल्लीमुल्लाह, मोहसिन  उल मुल्क ने अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना की गयी ।

सत्याग्रह आन्दोलन – यह आन्दोलन 1917ई. बिहार में महात्मा गांधी ने सर्वप्रथम शुरू किया जो यूरोपीय नील बागान मालिको की तिनकठिया प्रणाली के विरुद्ध था जो व्यापक रुप से चला।

रौलट एक्ट –  इसके तहत किसी भी राजद्रोही व्यक्ति को सरकार बिना मुकदमे चलाये हे उसे बंदी बनाकर रख सकती थी।

जलियांवाला हत्याकांड – (13 अप्रैल 1919 ई.) रौलट एक्ट लागू होने से क्रांती और तेजी से आगे बड़ी जिसमे जलियावाला में धोके से क्रान्तिकारियों पर गोलिया बरसाई गयी जिसमे बहुत से लोग मारे गये।

खिलापत आंदोलन (1920-22ई.) –  प्रथम विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजो ने तुर्की खलीफा के विरुद्ध अपनानपूर्ण व्यवहार किया गया जिससे भारतीय  मुसलमान में अशांती के कारण अंग्रेजो  के खिलाफ यह आन्दोलन चलाया गया।

असहयोग आन्दोलन (1920-22ई.) – 1 अगस्त 1920 में महात्मा गांधी ने ब्रिटीश भारत की राजनिती, सामाजिक और आर्थिक संस्थाओं का बहिष्कार करने के लिए असहयोग आन्दोलन शुरू किया गया जिसे व्यापक रूप से चलाया गया।

स्वराज्य पार्टी – इस पार्टी के संस्थापक सी.आर.दास. व मोतीलाल नेहरू ने की  थी जिसका उध्येश्य आतंरिक भारतीय निर्वाचन कार्य प्रणाली में बदलाव करना था।

बटलर समिति – यह भारत सरकार व देशी रियासतों  के बिच में सम्बन्ध सुधारने के लिए इस समिति का गठन किया गया।

साईमन कमीशन – यह ब्रिटिश सरकार की इस नीती में सविधान की व्यवस्था में विचार करने के लिए 7 सदस्य का आयोग नियुक्त किया गया था जिसका भारतीय जनता ने इसे अस्वीकार करते हुए ‘साईमन वापस जाओ’  के नारे लगाये।

दांडी मार्च व सविनय अवज्ञा आन्दोलन – 12 मार्च 1930 ई. को साबरमती आश्रम से गांधी जी दांडी पहुचकर अपने सहयोगियों के साथ ‘नमक कानून तोड़कर’ ‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’ का शुभारम्भ किया गया।

बारदोली सत्याग्रह – यह बारदोली सूरत में वल्लभ भाई ने चलाया जिसमे महिलाओं ने इन्हें ‘सरदार’ कहा गया।

पूना समझौता – यह गांधी जी व अम्बेडकर के बिच हुआ  जिसमे केन्द्रीय  विधानमंडल  में हरिजनों के लिए आरक्षण व्यवस्था को अलग कर उनका निर्वाचन मंडल ख़त्म कर दिया गया।

भारत छोडो आन्दोलन (1942 ई.) – यह आन्दोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व  में  8  अगस्त 1942 ई. में ग्वालिया टैंक मैदान में कांग्रेस अधिवेशन में भारत छोडो आन्दोलन की शुरुआत की।  गांधी जी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था, यह  आन्दोलन  पुरे देश  में फ़ैल गया लम्बे तक से चलता रहा था।

 

 

 

 

“A debt of gratitude is in order For To Read This Blog..!”

 

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