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June 22, 2017
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June 22, 2017

राजस्थान के दुर्ग | Rajasthan GK

राजस्थान के दुर्ग by Innoza It Center Udaipur, Rajasthan

राजस्थान के दुर्गो की एतिहासिक पहचान ही कुछ खास सबसे अलग है, जिसमे प्रमुख है :

चित्तोड़ का किला – यह राजस्थान का सर्वोच्च किला है जो राजस्थान के गौरव के लिए प्रसिद्ध है यह गंभीरी और बेडच नदियों के संगम स्थल के समीप अरावली पर्वतमाला के विशाल पर्वत पर स्थित है इसका निर्माण राजा चित्रांग (चित्रांगद) ने करवाया था।

कुम्भलगढ़ दुर्ग – यह राजसमन्द जिले में मेवाड़ व मारवाड़ की सीमा पर सादडी गाँव अरावली पर्वत माला पर स्थित है। जिसका निर्माण मोरी शासक महाराणा कुम्भा ने बनवाया था। महाराणा प्रताप का जन्म भी इसी दुर्ग में हुआ। यही से महाराणा प्रताप ने मेवाड़ पर शासन शुरु किया था। इसमे एक लघु दुर्ग कटारगढ भी है जिसमे ‘झाली रानी का मालिया’ महल एवं बादल महल प्रमुख है।

रणथम्भौर दुर्ग – इसे गिरी दुर्ग व वन दुर्ग भी कहते है यह सवाई माधोपुर में स्थित है, इसका निर्माण अजमेर के चौहान शासको ने 8वी सदी के लग-भग कराया था। यह अरावली पर्वत श्रंखलाओ से गिरा है। अजमेर शासक पृथ्वीराज चौहान के तराइन के दुसरे युद्ध में हार जाने के बाद उनके पुत्र गोविन्दराज ने यहाँ शासन स्थापित किया। इसके बाद अलाउद्धीन खिलजी ने छल-कपट से आक्रमण कर इसे कब्जे में ले लिया गया था। मुग़लकाल में इसको शाही कारागार के रुप भी उपयोग किया गया मुग़लसाम्राज्य के पतन के बाद जयपुर नरेश माधोसिह प्रथम के अधिकार में आ गया। आजादी तक इस दुर्ग पर जयपुर रियासत का अधिकार रहा इस प्रकार यह एक एतिहासिक दुर्ग है।

जालौर दुर्ग ( सुवर्ण गिरी दुर्ग ) -यह दुर्ग राजस्थान के जालौर में स्थित है जो मारवाड़ की सुकडी नदी के किनारे सोनगिरी पहाडी पर स्थित है, इसे सोनगढ़ व सोनलगढ़ भी कहते है। इसका निर्माण प्रतिहार नरेश नागभट्ट प्रथम ने करवाया था, बाद में इस पर खिलजी का भी शासन रहा था।

सोजत दुर्ग – यह जोधपुर में मारवाड़ व मेवाड़ की सीमा पर नानी सिरडी नामक पहाडी पर स्थित है, इसका निर्माण राव जोधा के पुत्र निम्बा ने करवाया था यह सुकडी नदी के किनारे बसा हुआ है। इस पार महाराणा कुम्भा का भी कुछ समय तक अधिकार रहा था।

मेहरानगढ़ जोधपुर दुर्ग – जोधपुर में यह दुर्ग जिसका निर्माण राव जोधा ने करवाया था। इसे चिंतामणी भी कहा जाता है। इसमे तोप, तलवारे व राजाओं महाराजाओं के वस्त्र एवं हथियारों का संग्रहण है।
किलोणगढ़ दुर्ग – यह बाड़मेर में स्थित है जिसका निर्माण राव भीमोजी ने करवाया था।

अचलगढ़ दुर्ग – यह सीरोही आबू पर्वत पर स्थित है जिसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने परमार शासको द्वारा बनवाया गया था। यहाँ भवराथल, अचलेश्वर महादेव, मंदाकिनी कुंड व सिरोही के महाराव मानसिह का स्मारक भी यहाँ का एतिहासिक है।

तारागढ़ दुर्ग बूंदी – यह राजस्थान के बुदी में स्थित है जिसका निर्माण बूंदी के राव देवा के वंशज राव बरसिह ने बनवाया था जो एतिहासिक है।

तारागढ़ या अजयमेरु दुर्ग – यह राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित है जिसका निर्माण चौहान शासक अजपाल ने बीठली पहाडी पर करवाया मेवाड़ ककी राणा रायमल के पुत्र पृथवीराज ने इस दुर्ग के कुछ भाग बनवाए व अपनी पत्नी वीरांगना तारा के नाम पर इसका नाम तारागढ़ रखा गया।

टॉडगढ़, अजमेर – अजमेर में स्थित इसका निर्माण कर्नलटॉड ने करवाया था।

आमेर दुर्ग – आमेर में स्थित इस दुर्ग का निर्माण राजा मानसिह प्रथम ने करवाया था। आमेर को प्राचीनकाल में अम्बावती व अम्बिकापुर कहा जाता था।

जयगढ़ दुर्ग – आमेर का यह दुर्ग राजा मानसिह प्रथम ने करवाया था बाद में मिर्जा राजा जयसिह ने इसे अपने नाम पर जयगढ़ रख लिया, यह भी एतहासिक दुर्ग है।

नाहरगढ़ दुर्ग – यह दुर्ग जयपूर के मुकुट के समान है। इसका निर्माण महाराजा सवाईजयसिह ने करवाया था। इसका प्राचीन नाम सुदर्शनगढ़ था। बाद में इसका नाम वहा स्थित लोक देव नहारसिह भोमिया के नाम पर पडा यह एतिहासिक दुर्ग है।

मांडलगढ़ – यह दुर्ग भीलवाड़ा में बेडच, बनास व मेनाल के त्रिवेणी संगम के पास अरावली पर्वतमाला में बना हुआ है। इसका निर्माण माँडीया भील के नाम पर चानणा नामक गुजर ने करवाया था।

दौसा का किला – यह किला दौसा में देवगिरी पहाडी पर यह गुर्जर प्रतिहारो ने बनवाया था। दौसा कछवाहो की प्राम्भिक राजधानी थी इन्होने इस दुर्ग के अन्दर अनेक भवन बनवाये गए है।

अलवर दुर्ग (बाबा का किला ) – अलवर का यह किला जनश्रुति के अनुसार आमेर नरेश काकिलदेव के कनिष्ठ पुत्र अलघुराय ने इस पर्वत पर एक किला बनवाया था। जिसके निचे अलपुर नगर बसाया था। वर्तमान में यहाँ रावण देहरा नाम से प्रसिद्ध है, बाद में अलग अलग शासको ने अलग – अलग भवनों व मंदिरों का निर्माण किया गया जो एतिहासिक है।

कांकवाडी दुर्ग – यह दुर्ग अलवर के घने जंगल सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में स्थित है। माना जाता है की इस दुर्ग का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाईजयसिह ने करवाया था बाद मे इस दुर्ग पर अलवर की राव प्रतापसिह का अधिकार रहा।

नीमराणा का किला – यह नीमराणा में स्थित है, इसे चौहान शासको ने बनावाया था। यह पंचमहल के नाम से विख्यात है।

भानगढ़ दुर्ग – अलवर से कुछ दूरी पर इसका निर्माण जयपूर राजा माधोसिह ने करवाया था। इसे भुतहा किले के नाम से जानते है।

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