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सामान्य ज्ञान जून 2017 भाग - 1 by Innoza IT Center
सामान्य ज्ञान जून 2017 भाग – 1 | Rajasthan GK
June 20, 2017
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राजस्थान की प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति | Rajasthan GK

राजस्थान की प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति by Innoza IT Center, Udaipur

कालीबंगा : कालीबंगा सभ्यता का काल कार्बन पेंटिंग के आधार पर 2350 ई. पूर्व से 1750 ई पूर्व माना जाता है यह स्थल प्राचीन सरस्वती वर्तमान (घग्घर) नदी के तट पर है, कालीबंगा में दो टीलो पर उत्खनन कार्य किया गया इसमे पूर्व हड़प्पा कालीन सभ्यता के अवशेष मिले है, जो लगभग 2350 वर्ष ई. पूर्व विकसित हुई थी यह पुराने काल की एक नगरीय प्रधान सभ्यता थी।

ओझियाना : यह भी ताम्रयुगीन की सभ्यता के अवशेष है जो वर्तमान में भीलवाड़ा के बदनोर के पास स्थित है, यहाँ से प्राप्त गाय की लघु मीणकृति बहुत ही महत्वपूर्ण है, यह पहाडी पर विकसित सभ्यता के अवशेष है।

आहड सभ्यता (उदयपुर) : यह सभ्यता मेवाड़ से बेडच व बनास नदियों के किनारों से हमें इसके साबुत मिलते है इसका प्राचीन नाम ताम्रावती नगरी था 10वी, 11वी सदी में इसे आघाटपुर (आघाट दुर्ग) के नाम से भी जाना जाता था।

गिलुण्ड : राजसमंद जिले में बनास नदी के तट से कुछ दूरी पर स्थित गिलुण्ड की खुदाई में ताम्रयुगीन सभ्यता के एवं उससे पहले की सभ्यताओ के अवशेष मिले है, यह स्थल आहड सभ्यता से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

गणेश्वर : राजस्थान के सीकर जिले में नीम का थाना कस्बे से कुछ दूरी पर गणेश्वर नामक स्थान पर कातली नदी के टीले से ताम्रउपकण कुल्हाड़े , फरसे, मछली पकड़ने के कांटे आदी यहाँ देश में पहली बार एक साथ इतनी मात्रा में अवशेष मिले, यह सबसे पुरानी सभ्यता है।

लाछुरा : भीलवाड़ा जिले के आसींद तहसील के लाछुरा गाँव में स्थित हनुमान नाले के पास से अवशेष मिले जो मिट्टी की मानव आकृति प्रमुख है।

बालाथल : उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील में बालाथल गाँव के पास एक टीले के उत्खनन से यहाँ ताम्र-पाषाणकालीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए है।

रंगमहल : राजस्थान के हनुमानगड़ जिले में प्राचीन सरस्वती नदी वर्तमान ( घग्घर ) नदी के पास स्थित है, यहाँ कुषाणकालीन एवं पुर्वगुप्त्कालीन संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए है जो ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी से 300 ई. के आसपास यहाँ पनपी थी यह गांधार शैली की मालुम होती है।

नोह : यह राजस्थान के भरतपुर से 6 किलोमीटर दूर आगरा रोड स्थित नोह स्थान पर की गयी खुदाई में पांच सांस्कृतिक युगों के अवशेष है जिसमे कुषाण कालीन एवं मोरी कालीन सभ्यता के अवशेष भी मिले है।

बैराठ : राजस्थान के जयपुर जिले के बैराठ प्राचीन काल में मत्स्य की राजधानी हुआ करता था जिसका प्राचीन नाम विराटनगर था यहाँ बीजक की पहाडी, भीमजी की डूंगरी तथा महादेव जी की डूंगरी आदी स्थानों पर उत्खनन में मौर्यकालीन एवं उसके पूर्व की सभ्यताओ के अवशेष मिले है, यहाँ बौध्द मठ के अवशेष भी मिले है।

बागोर : राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की मांडल तहासील में कोठारी नदी के किनारे स्थित इस पुरात्विक स्थल का उत्खनन में मध्य पाषाणकालीन युग के अवशेष मिले है।

नगरी : चित्तोडगढ से 13 किलोमीटर दूर नगरी की खुदाई सर्वप्रथम 1904 में यहाँ गुप्तकालीन के अवशेष है।

जोधपुरा (जयपुर) : यह जयपुर की साबी नदी की किनारे कोठपुतली तहसील में जोधपूरा गाँव में प्राचीन टीले की खुदाई में कुषाणकालीन युग के अवशेष मिले है।

सुनारी (खेतड़ी झुंझनु) : राजस्थान के झुंझनु जिले में लोहे के शस्त्र के अवशेष मिले है यहाँ के लोग कृषि पर ज्यादा निर्भर रहते है।

तिलवाड़ा : राजस्थान के बाड़मेर जिले में लूनी नदी के किनारे यहाँ ई. पूर्व 500 से ई. 200 तक की अवधी के विकसीत सभ्यताओ के अवशेष मिले है।

अहेडा (सरवाड़ – अजमेर ) : यहाँ गुप्तकालीन सिक्को का भण्डार (दफीना) मिला है, जिसमे गुप्तकालीन सीक्को का राजस्थान में सबसे बडा भण्डार मिला है।

नालियासर : राजस्थान के जयपुर सांभर झील के निकट खुदाई से चौहान युग से पूर्व की सभ्यता की अवशेष मिले है।

रेढ़ ( टोंक ) : राजस्थान के टोंक जिले में निवाई तहसील में ढील नदी के केनारे स्थित इस गाँव में पूर्वगुप्तकालीन सभ्यता तक के अवशेष प्राप्त हुए है यहाँ सैकड़ो चांदी की मुद्राये भी मिली है।

नगर : राजस्थान के टोंक जिले के उनियारा कस्बे का प्राचीन नाम मालव नगर था यहाँ के सिक्के मिले है यहाँ मालव गणराज्य की राजधानी थी इसमे गुप्तकालीन के लिखे लेख भी मिले है।

जुना खेडा , नाडोल ( पाली ) : राजस्थान की पाली जीले में यहाँ प्राचीन में चौहानों की राजधानी थी यहाँ पहला चौहानकालीन नगर है जहा ज्यादा अवशेष मिले है।

एलाना – जालौर जिले का एक स्थान जहा ताम्रयुगीन अवशेष मिले है।

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