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राजस्थान के लोक देवता और देविया By Innoza IT Center Udaipur
राजस्थान के लोक देवता और देविया | Rajasthan GK
June 13, 2017
सामान्य ज्ञान जून 2017 भाग - 1 by Innoza IT Center
सामान्य ज्ञान जून 2017 भाग – 1 | Rajasthan GK
June 20, 2017

राजस्थान के वन और वन्य जीव | Rajasthan GK

राजस्थान के वन और वन्य जीव By Innoza IT Center, Udaipur

 वनस्पति , वन्य जीव और जीव विवधता : 

  • प्रदेश का कुल वन क्षेत्र : 32737 वर्ग किमी.
  • राज्य के कुल भोगोलिक क्षेत्र का प्रतिशत वन क्षेत्र : 9.57 प्रतिशत
  • राज्य मे आरक्षित वन : 12475 वर्ग किमी (38.11 प्रतिशत)
  • रक्षित वन: 18217 वर्ग किमी.(55.65 प्रतिशत)
  • अवर्गीक्रत वन : 2045 वर्ग किमी.
  • अत्यधिक सघन वन क्षेत्र : (72 वर्ग किमी.)
  • सघन वन क्षेत्र : 4424 वर्ग किमी.(1.29 प्रतिशत)
  • खुले वन : 11590 वर्ग किमी.

 वनों के प्रकार : 

 

  • शुष्क सागवान वन 2247.87, 06.86
  • अर्द्धशुष्क उष्ण कटिबन्धीय धोंक वन 19027.75, 58.11
  • उष्ण कटिबन्धीय धोंक वन 9293.65, 28.38
  • उषण कटिबन्धीय या मरुस्थलीय वन 2048.58, 6.26
  • अर्द्ध उषण कटिबंधीय सदाबहार वन : 126.64,  00

1. शुष्क सागवान : 75 से 110 से.मी. वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र मे पाये जाते है।  इन वनों का मुख्य व्रक्ष देशी सागवान है.सगन वन बांसवाडा क्षेत्र मे पाये जाती है। बरगद , आम , तेंदू, गुलर , महुआ , साल ,खेर आदि. अन्य व्रक्ष पाये जाते है।

2. उषण कटिबन्धीय शुष्क या मिश्रित पतजड़ वन : दक्षिणी और दक्षिणी पूर्वी अरावली के मध्य पाये जाते है. वर्षा का वार्षिक औसत 50 से 80 से.मी. आम, खेर, ढाक, साल, बाँस अन्य व्रक्ष पाये जाते है।

3. उपोष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन :- 150 से.मी. या अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र मे पाये जाते है. सिरस, बाँस, बेल, जामुन, रोहिडा आदि व्रक्ष पाये जाते है।

4. शुष्क या मरुस्थलीय वन : वर्षा का वार्षिक औसत 30 से.मी. से भी कम।  वनों की मुख्य वनस्पति खेजड़ी, बाबुल, थूहर, केर, कीकर, बेर, फोग और अन्य कटीली झाडिया  तथा सेवण  धामन, मूरात आदि घास है।

  • दक्षिणी –पूर्वी मे सगन वनों का मुख्य विस्तार है।
  • सबसे ज्यादा वन क्षेत्र वाला जिला उदयपुर है।
  • दक्षिणी क्षेत्र मे सागौन के वन प्रमुख रूप से पाए जाते है।
  • “अवर्गीक्रत वन सबसे कम क्षेत्र मे फेले हुए वन है।
  • “काटेदार पेड़ और झाडिया” वाले वन राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय भाग मे पाये जाते है।
  • शुष्क सागवान मुख्यत बांसवाडा जिले मे पाये जाते है।
  • राजस्थान का मुख्य व्रक्ष “खेजड़ी” है।

 

 वन्य जीव : 

 

  • राज्य मे 26 वन्य जीव अभ्यारण है।
  • राज्य मे 5 जन्तुआलय “ जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा मे है।
  • जेविक उद्यान का कार्य “उदयपुर मे सज्जनगढ और जयपुर मे नाहरगढ़ मे प्रराम्भ किया गया है।
  • गोडवाण के प्रजनन जोधपुर जंतुआलय मे सफलतापूर्वक किया जा रहा है।
  • “जोधपुर मे माचिया जेविक उद्यान”, “उदयपुर मे सज्जनगढ जेविक उद्यान”, “कोटा मे अभेड़ा जेविक उद्यान” और “जयपुर मे नहारगढ जेविक उद्यान” को क्रमानुसार स्तानात्रित किया जाना है।
  • “1887” मे “वन्य पक्षी सुरक्षा अधिनियम भारत मे पहली बार वन्य जीवो के लिए बनाया गया।
  • 23 अप्रैल 1951 को राजस्थान मे “राजस्थान वन्य पशु और पक्षी संरक्षण अधिनियम लागु किया गया।
  • राजस्थान मे अब तीन बाघ परियोजना संचालित की जा रही है. “ रणथम्भोर, सरिस्का और मुकन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व।
  • रणथम्भोर परियोजना क्षेत्रफल की द्रष्टी से देश की सबसे छोटी बाघ परियोजना है।
  • देश की पहली बाघ परियोजना “जिमकार्बेट नेशनल पार्क, उतराखंड 1973” मे शरू की गई थी।
  • “दर्र वन्य जीव कोटा, झालावाड”  धोकड़ा वनों और गगरोनी तोते के लिए बहुत प्रसिद है।
  • “भेसरोडगढ़ अभ्यारण, चितोड़गढ़” ये घड़ियालो के लिए प्रसिद्ध है।
  • “सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण, अलवर” राज्य का सबसे छोटा अभ्यारण है।
  • राजस्थान का सबसे बड़ा अभ्यारण “राष्ट्रीय मरू उद्यान, जैसलमेर” जो राज्य पक्षी गोडवाण और चिंकारा के लिए प्रसिद है।

 एक से अधिक जिलो मे विस्तृत अभ्यारण : 

 

  • राष्ट्रीय चम्बल अभ्यारण (कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, धोलपुरी, करोली – घड़ियालो के लिए प्रसिद्ध है।
  • टॉडगढ़ रावली अभ्यारण अजमेर, पाली व राजसमन्द मे स्थित है।
  • कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण – उदयपुर, पाली, राजसमन्द (रणकपुर के जैन मंदिर)
  • हर सागर वन्य जीव अभ्यारण (कोटा,बूंदी, चितोड़गढ़)
  • सीतामाता अभ्यारण – चितोड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर ( उड़न गिलहरी, जाखम बांध, सागवान वनों का एकमात्र अभ्यारण)
  • सुंडामाता (जालोर –सिरोही) राजस्थान का प्रथम भालू अभ्यारण है।
  • राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर, बाड़मेर)
  • केवलादेव घना अभ्यारानण मे कदम्ब के व्रक्ष बहुतयात मिलते है।
  • मुकुंदरा हिल्स रास्ट्रीय अभ्यारण : कोटा, चितोड़
  • जोधपुर जिले मे अम्रता देवी मर्ग वन स्तिथ है।
  • राजस्थान मे बीडी उद्योग के लिए “तेंदू” व्रक्ष काम मे आता है।
  • रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान मे प्रथम वन्य जीव अभ्यारण घोषित हुआ था।

“A debt of gratitude is in order For To Read This Blog..!”

 

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