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लोक प्रशासन भाग -1:अर्थ,क्षेत्र,प्रक्रति महत्व और अभ्युदय
लोक प्रशासन भाग – 1 : अर्थ, क्षेत्र, प्रक्रति महत्व और अभ्युदय | Rajasthan GK
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लोक प्रशासन भाग – 2 : संगठन की विचारधारा | Rajasthan GK

लोक प्रशासन भाग - 2 : संगठन की विचारधारा

 संगठन की प्रमुख विचारधारये : 

  • परम्परावादी विचारधारा (एफ.डब्लुय.टेलर (अमेरिका) के  जन्मदाता थे। )
  • वैज्ञानिक प्रबंध विचारधारा (फ्रेडरिक विंसलो टेलर इस विचारधारा के जनक थे। )
  • नव-प्रति प्रतिष्ठित विचारधारा (एल्टन मेयो को इस विचारधारा का जनक माना जाता ह। )
  • व्यवहारवादी विचारधारा
  • नौकरशाही विचारधारा (इस विचारधारा का प्रतिपादन जर्मन समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने किया)
  • व्यवस्था उपागम
  • आधुनिक विचारधारा
  • निर्णयन विचारधारा (इस विचारधारा का विकास हर्बर्ट साइमन को है)
  • प्राणी विज्ञान विचारधारा
  • तुलनात्मक विचारधारा (इस विचारधारा का विकास प्रो.अर्नेस्ट डेल)
  • क्रीड़ा सिदान्त विचारधारा
  • संचार साधन विचारधारा
  • “परम्परावादी विचारधारा”  संगठन विचारधारा को  एक बंद व्यवस्था मानती है।
  • प्रशासनिक प्रक्रियाओ मे “POSDCORB” शब्द का उपयोग “लूथर गुलिक ने किया था।
  • समय और गति अध्यन प्रयोगों सम्बन्ध संगठन की “वैज्ञानिक प्रबंध उपागम” विचारधारा से है।
  • “नव- प्रतिष्ठित विचारधारा “ मानवीय पक्ष का महत्व सर्वप्रथम संगठन की इस विचारधारा ने प्रदान किया।
  • “आधुनिक विचारधारा” संगठन की विचारधारा को सम्पूर्ण संगठन को एक पद्धति मानकर उसका अध्यन करती है।
  • general and industrial अद्मिनिस्त्रतिओन्न पुस्तक के लेखक “हेनरी फेयोल है।
  • लूथर गुलिक ने संगठन के “10” सिदान्त बताये।
  • “1930-1932 ई. में” संगठन की मानव सम्बन्ध विचारधारा का जन्म हुआ।
  • व्यवहारवाद का जनक “डेविड ईस्टन” को कहा जाता है।
  • नौकरशाही के तीन तत्व
    1. सुनिश्चितता
    2.  क्रमागत
    3. अनुसाशन

 

 प्रशासनिक व्यवहार – निर्णयन, मनोबल ओर अभिप्रेरणा : 

निर्णयन का शाब्दिक अर्थ : अन्तिम परिणाम तक पहुँचना।  निर्णयन एक प्रक्रीया है जिसके माध्यम से एक  निष्चित निर्णय पर पंहुचा जाता है।

निर्णयन के प्रकार:

  • कार्यात्मक और अकर्यात्मक
  • देनिक और आधारभूत निर्णय
  • संगठनात्मक और व्यक्तिगत निर्णय
  • सामने और विशेष निर्णय
  • व्यक्तिगत निर्णय और सुमह निर्णय
  • निति , प्रसासनिक और संचालन सम्बन्धी निर्णय

अच्छे निर्णय के गुण :

  • मितव्ययी
  • नेतिक द्रष्टि से उचित
  • सक्षम अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय
  • प्रासंगिक ओर समसामयिक
  • स्वीकार्य योग्य
  • वस्तुनिष्ठता
  • विधि अनुकूल
  • समाज के अनुकूल
  • उद्देश्योनमुख
  • पूर्ण
  • व्यवहारिक

निर्णयन की बाधाये :

  • क़ानूनी सीमा
  • बजट
  • लोकाचार
  • तथ्य
  • इतिहास
  • मनोबल
  • भविष्य की सम्भावनाये
  • उच्चाधिकारी
  • दबाव समहू
  • अधीनस्थ कार्मिक
  • स्टाफ कार्मिक
  • कार्यकर्म की प्रक्रति

निर्णय की तकनीके :

  • अनुमान आधारित निर्णय (अनुमानात्मक)
  • प्रबंध के सिदान्त आधारित तकनीक
  • प्रतिरूप निर्माण
  • आर्थिक तथा वितीय विधि
  • व्यवहार तकनीक
  • सांख्यिकी विधि
  • विशिष्ट निर्णय तकनीके
  • रेखीय कार्यक्रम
  • अनुरूपण
  • क्रीड़ा सिदान्त
  • क्रियात्मक अनुसन्धान
  • प्रतिरक्षा सिधांत
  • डेल्फी तकनीकी
  • नाममात्र समूह तकनीकी

 

 मनोबल : 

कार्य के प्रति उत्साही प्रवति तथा रूचि सम्बन्धी भावना और सबसे अच्छी विचारधारा।  इससे उत्साही होकर वो और अधिक कार्य करता है और क्रियाशील बनता है।

मनोबल विकसित करने के कुछ उपाय :-

  • कार्य करने की उचित दशाए
  • प्रेरणात्मक नेर्त्त्व
  • उच्चाधिकारी के अधीनस्थो के प्रति सहानुभूति पूर्ण द्रष्टिकोण
  • संगठन के उदेश्यों की जानकारी
  • देश-प्रेम और राष्ट्र भक्ति की भावना का विकास करना
  • कर्मचारी की गरिमा
  • लोक सेवको के प्रति जनता की सदभावना
  • पुरुष्कारो की व्ययवस्था
  • कार्यो के महत्वपूर्ण और मूल्यवान होने की अनुभूति
  • निति निर्माण मे सहभागिता

अच्छे मनोबल के परिणाम

  • कर्मचारियों द्वारा अधिक परिश्रम
  • स्वाभिमान मे आत्मगौरव की भावना
  • सामूहिक कार्य करने प्रवति को बढावा मिलता है।
  • कर्मचारी मे उत्साह को बढावा मिलता है।
  • मनोबल के माध्यम से व्यक्तिगत उर्जा का उपयोग अधिक किया जा सकता है।

 

 अभिप्रेरणा

“ मानव की मनोवैज्ञानिक प्रवति है। इससे उतेजित होकर मानव और भी ज्यादा सक्रीय, कुशल और अधिक उत्साही बनता है। और इससे वो अपने कार्य को पूरा करनी क लिए अधिक उत्साही बना रहता है। ”

अभिप्रेरणा के महत्व से होने वाले लाभ :

  • कर्मचारियों को आवश्यक प्रोत्सहन देने से लक्ष्यों को समय और समय से पहले प्राप्त करना आसन हो जाता है।
  • अभिप्रेरणा के माध्यम से संघठन मे मानवीय सम्बन्धो की स्थापना को बल मिलता है।
  • कर्मचारियों का उच्स्तर मनोबल बनाये रखने मे मदद मिलती है।
  • अभिप्रेरणा के माध्यम से कर्मचारियों से सहयोग प्राप्त करना आसन होता है।
  • निर्णयन एक प्रक्रिया है. जो “मानवीय,बौदिक , क्रमिक” स्तरो को समाविष्ट करती है।
  • साइमन के निर्णय मे “कार्यात्मक और अकार्यात्मक निर्णय ” को समिमलित किया गया।
  • “पीटर एफ. ड्रकर” द प्रेक्टिस ऑफ़ मेंनेजमेंट के लेखक
  • “चेस्टर बनार्ड” के निर्णयन को संगठनात्मक और व्यक्तिगत निर्णय के रूप मे वर्गीकृत करते है।
  • निम्न स्तरीय लोग “कार्यकारी निर्णय” लेटी है।
  • निर्णयन मे “ वैधानिकता, गतिशीलता, तार्क्रिकता” निहीत होते है।
  • “यूनानी धर्मग्रन्थ” मे डेल्फी शब्द जो प्रबंध मे प्रयुक्त होता है उसका उल्लेख किया गया है।
  • आर्थिक मानव प्रतिमान, प्रशासनिक मानव प्रतिमान, सामाजिक प्रतिमान “निर्णयन के प्रचलित प्रतिमानों मे से है। ”
  • संयुक्त राज्य अमेरिका मे “PERT” (कार्यक्रम मुल्यांकन पुन: निरीक्षण विधि) का सर्वप्रथम प्रयोग हुआ।
  • जेम्स सी. मार्च के साथ मिलकर साइमन  ने  निर्णयन प्रक्रिया एक चरण “अनुवर्तन” को जोड़ा।
  • “समस्या के इतिहास का पता लगाना” हरबर्ट साइमन के द्वारा बताई गयी प्रक्रिया के चरण (अन्वेषण आसूचना) मे समिमलित होता है।
  • “आर्थिक मानव प्रतिमान” पूर्ण विवेकशीलता प्रतिमान द्वारा समर्थित है।
  • “प्रशासनिक मानव प्रतिमान” की मान्यता है की व्यक्ति ना तो पूर्ण तार्क्रिकता से और न ही पूर्ण भावुकता के आधार पर निर्णय लेता है। बल्कि एक संतोषजनक निर्णय खोजता है।
  • “वृद्धि परक प्रतिमान” का मानना है की पूर्व मे लिए गये निर्णय और परम्पराये व्यक्तियों के निर्णय का आधार बनते है।
  • पब्लिक पॉलिसी मेंकिंग-री-एगजामिनड पुस्तक के लेखक “येहेजेकल डौर” थे।
  • अभिप्रेरणा का सिदान्त “इच्छाओ , आवश्यकताऔ और उदेश्यों पर बल देता है।
  • नियंत्रण और सम्प्रेषण के विज्ञान को “साइबरनेटिक्स” कहते है।
  • सम्प्रेषण का सार “सुचना” है।

 

“A debt of gratitude is in order For To Read This Blog..!”

 

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